Ganesh Aarti MP3 Songs Download | गणेश जी की आरती डाउनलोड करे

Ganesh Aarti MP3 Songs Download | गणेश जी की आरती डाउनलोड करे

Ganesh Aarti MP3 Songs Download हिंदू धर्म विश्व के प्राचीनतम धर्मों मे गिना जाता है । हिंदू धर्मा मे पूजा अर्चना का बहुत ही महत्व है । किसी भी धार्मिक प्रायोजन या फिर कोई भी शुभ कार्य करने से पूर्व अपने ईष्ट देवी देवता की आराधना करने की परंपरा रही है ।

Ganesh Aarti MP3 Songs Download

हिंदू धर्म मे गणेश भगवान को सर्व प्रथम स्थान दिया गया है । अतः किसी भी धार्मिक प्रायोजन या फिर शुभ कार्य करने से पहले भगवान गणेश की आराधना करना अति आवश्यक और फलदायी माना जाता है । ऐसी मान्यता है की, गणेश भगवान कार्यों मे आने वाली अड़चनो और बाधाओं का निवारण करके सफलता प्रदान करते हैं । इसीलिए उनको विघ्न हरने वाला भी कहा जाता है । शास्त्रो के अनुसार देवी देवता भी किसी भी कार्य को सफल और विघ्न रहित बनाने के लिए भगवान गणेश की अर्चना किया करते थे । इसलिए किसी भी, कार्य, यज्ञ, अनुष्ठान, आदि शुभ कार्यों से पूर्व, सर्व प्रथम भगवान गणेश की आराधना करने का विधान, देवताओं द्धारा ही निर्मित किया गया है । उनके बाद ही किसी अन्य देवी देवता की पूजा करने से फलित होता है ।
शास्त्रो के अनुसार, अनेको बार प्रयास करने के बाद भी जब भगवान शिव राक्षस त्रिपुरा सुर का संहार करने मे सफल नही हो रहे थे । उन्होने बहुत विचार किया की उनको सफलता क्यों नही मिल र्ही है । अंततः, उन्हे याद आया की वो भगवान गणेश की आराधना किए बिना ही संहार करने निकले थे, इसलिए उनके कार्य मे बाधा आ रही है और वो सफल नही हो रहे हैं । अंततः उन्होने भगवान गणेश की आराधना की और उन्हे लड्डू का भोग लगा कर संहार के लिए निकले और त्रिपुरसुर का संहार करने मे सफल हुए । इसीलिए, भगवान गणेश को सभी प्रकार के विघ्न का विनाश करने वाला बताया गया है । पुराणों के अनुसार, गणेश भगवान की आराधना से शनि और अन्या सभी ग्रहों के दोष भी दूर हो जाते हैं । बुधवार को गणेश भगवान का शुभ दिन माना जाता है । कहा जाता है की, बुधवार को गणेश भगवान की अर्चना करने से समस्त प्रकार के कष्ट और विघ्न मिटते हैं । सुख और सौभाग्या बढ़ता है, और नकारात्मकता मिटाने मे विशेष लाभ होते हैं ।

गणेश जी की आरती पूजन विधि। | Ganesh Aarti MP3 Songs Download

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 Ganesh Aarti MP3 Songs Download: भगवान गणपति अर्थात गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए विधि पूर्वक उनकी आराधना करनी चाहिए । उनके पूजा करने की विधि यहा वर्णित है । प्रातः काल उठ कर स्नान करके शुद्ध हो जाइए । सबसे पहले ताम्र पत्र पर निर्मित, श्री गणेश यंत्र को मिट्टी, नमक और नींबू से अच्छी तरह साफ कर लीजिए । अब मंदिर या फिर घर मे बने पूजा स्थल पर पूर्व दिशा या फिर उत्तर दिशा मे मुँह करके आसान ग्रहण कीजिए । अपने सामने श्री गणेश यंत्र को स्थापित करें । पूजा के लिए सभी आवश्यक सामग्री को एकत्र कर लीजिए । सामग्री मे फूल, दीप, धूप, कपूर, रोली, चंदन, मौलि और प्रसाद के लिए मोदक होना चाहिए । अब दीप प्रज्ज्वलित करके धूप लगाएँ. भगवान को चंदन, फूल, रोली आदि अर्पित करें और मोदक चढ़ाएँ । इसके बाद कपूर प्रज्ज्वलित कर भगवान की आरती करें । उसके बाद आँख बंद करके, भगवान गणपति को स्मरण करें और 108 बार ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करें ।

भगवान गणपति की पूजा करने की विधि | Ganesh Aarti MP3 Songs Download

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Ganesh Aarti Download: भगवान गणपति अर्थात गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए विधि पूर्वक उनकी आराधना करनी चाहिए । उनके पूजा करने की विधि यहा वर्णित है । प्रातः काल उठ कर स्नान करके शुद्ध हो जाइए । सबसे पहले ताम्र पत्र पर निर्मित, श्री गणेश यंत्र को मिट्टी, नमक और नींबू से अच्छी तरह साफ कर लीजिए । अब मंदिर या फिर घर मे बने पूजा स्थल पर पूर्व दिशा या फिर उत्तर दिशा मे मुँह करके आसान ग्रहण कीजिए । अपने सामने श्री गणेश यंत्र को स्थापित करें । पूजा के लिए सभी आवश्यक सामग्री को एकत्र कर लीजिए । सामग्री मे फूल, दीप, धूप, कपूर, रोली, चंदन, मौलि और प्रसाद के लिए मोदक होना चाहिए । अब दीप प्रज्ज्वलित करके धूप लगाएँ. भगवान को चंदन, फूल, रोली आदि अर्पित करें और मोदक चढ़ाएँ । इसके बाद कपूर प्रज्ज्वलित कर भगवान की आरती करें । उसके बाद आँख बंद करके, भगवान गणपति को स्मरण करें और 108 बार ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करें ।
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र्जित चीजे | Ganesh Aarti MP3 Songs Download

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तुलसी :  भगवान गणेश से संबंधित सभी जानकारी के लिए गणेश पुराण का अध्ययन करना चाहिए । गणेश पुराण मे एक जगह प्रसंग आता है की एक बार गणेश भगवान तपस्या मे लींन थे  । देवी तुलसी वहाँ से जा रही थी । गणेश भगवान को देखकर उन पर तुलसी देवी मोहित हो गयी । उनकी तपस्या मे विघ्न डाल कर, उनसे विवाह करने का प्रस्ताव रखा । लेकिंग भगवान गणेश ने उनके प्रस्ताव को स्वीकार नही किया और कह दिया की वो आजीवन ब्रंहचारी रहना चाहते हैं । देवी तुलसी ने प्रस्ताव ठुकराए जाने से क्रोधित होकर भगवान गणेश को शाप दे दिया की उनको विवाह किसी भी स्थिति मे करना ही होगा । उनका ब्रंहचारी रहने का स्वप्न पूरा नही होगा । भगवान गणेश ने भी क्रोधित होकर शाप दे दिया की देवी तुलसी का विवाह एक असुर से होगा । कालांतर मे असुर जलंधर का विवाह देवी तुलसी से हुआ । गणेश भगवान की पूजा मे तुलसी को वर्जित माना जाने लगा। भगवान गणेश की पूजा मे तुलसी के प्रयोग से वो क्रोधित हो जाते हैं ।
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सूखे और टूटे हुए चावल : संपूर्ण चावल को अक्षत भी कहते हैं, जो टूटा हुआ ना हो। ऐसी मान्यता है की भगवान गणेश का एक दाँत टूटा हुआ है । जिस से उन्हे सूखा और कठोर चावल स्वीकार्य नही होता । उन्हे चावल गीला करके अर्पित करना चाहिए । जो उनके लिए स्वीकार करने मे सहज होता है । कहते हैं, टूटे हुए चावल का प्रयोग किसी भी देवी देवता की पूजा मे नही करना चाहिए । ये अशुभ का संकेत होता है और भगवान गणेश को क़तई स्वीकार नही है ।

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 श्वेत पुष्प : गणेश पुराण मे बताया गया है की भगवान गणेश को लाल पुष्प अत्यधिक प्रिय है । भगवान गणेश सूभ, उत्साह और उर्जा के प्रतीक माने जाते है। इसलिए उनकी आराधना मे लाल सिंदूर और पुष्प का प्रयोग अत्यधिक फलदायी माना जाता है । चंद्रमा ने भगवान गणेश को देख कर उनका उपहास किया था । श्वेत पुष्प चंद्रमा से संबंधित है, इसलिए भगवान गणेश की आराधना मे श्वेत पुष्प का प्रयोग पूर्णतया वर्जित माना जाता है । भगवान गणेश को श्वेत चंदन, श्वेत जनेऊ, और श्वेत वस्त्र भी अर्पित नही करना चाहिए । इस से वो क्रोधित हो और जाते हैं, जो हानिकार हो सकता है ।

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